तुम्हें ग़ैरों से कब फ़ुरसत, हम अपनों से कब खाली
चलो हो चुका मिलना, न तुम खाली, न हम खाली
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Tumhen ghairon se kab fursat, ham apnon se kab khali
Chalo ho chuka milna, na tum khali, na ham khali
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रचना: अज्ञात / Source: Unknown
बहे न कभी नैन से नीर
उठी हो चाहे दिल में पीर
बावरे यही प्रीत की रीत
बावरे यही प्रीत की रीत
फैली हुई हैं सपनों की बाहें,
आजा चल दें कहीं दूर
वहीँ मेरी मंज़िल, वहीं तेरी राहें
आजा चल दें कहीं दूर
वो चाँद खिला, वो तारे हँसे
ये रात अजब मतवारी है
समझने वाले, समझ गये हैं
न समझे? न समझे वो अनाड़ी है
वो चाँद खिला, वो तारे हँसे
ये रात अजब मतवारी है
दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है