Category Archives: Sher-o-Shayari

हसरत-ए-दीदार

दिल को नियाज़-ए-हसरत-ए-दीदार कर चुके देखा तो हम में ताक़त-ए-दीदार भी नहीं शेर: मिर्ज़ा ग़ालिब

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पापी दिल

मस्जिद तो बना दी शब भर में, ईमाँ की हरारत वालों ने दिल अपना पुराना पापी है, बरसों में नमाज़ी हो न सका शेर: इक़बाल

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अब तेरा इंतज़ार कौन करे…

सुरमई रात ढलती जाती है रूह ग़म से पिघलती जाती है तेरी ज़ुल्फ़ों से प्यार कौन करे अब तेरा इंतज़ार कौन करे

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मेरे साथी ख़ाली जाम…

महफ़िल से उठ जाने वालो, तुम लोगों पर क्या इल्ज़ाम तुम आबाद घरों के वासी, मैं आवारा और बदनाम मेरे साथी ख़ाली जाम…. दो दिन तुमने प्यार जताया, दो दिन तुमसे मेल रहा अच्छा खासा वक़्त कटा, और अच्छा खासा … Continue reading

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क्या उम्मीद करें हम उनसे…

क्या उम्मीद करें हम उनसे, जिनको वफ़ा मालूम नहीं ग़म देना मालूम है लेकिन, ग़म की दवा मालूम नहीं

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