Monthly Archives: January 2011

हिंदी की दुर्दशा

(काका हाथरसी के शब्दों में) बटुकदत्त से कह रहे, लटुकदत्त आचार्य सुना? रूस में हो गई है हिंदी अनिवार्य है हिंदी अनिवार्य, राष्ट्रभाषा के चाचा- बनने वालों के मुँह पर क्या पड़ा तमाचा कहँ ‘ काका ‘ , जो ऐश … Continue reading

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भारतेंदु हरिश्चंद्र की कुछ दिल रुझाने वाली रचनायें

Bharatendu Harishchandra’s (1850 – 1885) humorous satires composed as Hindi poems dealing with issues such as the importance of learning and respecting one’s own language (mother tongue), rampant corruption and other social vices, explotiation by the colonial rulers in the … Continue reading

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