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मेरे साथी ख़ाली जाम…

महफ़िल से उठ जाने वालो, तुम लोगों पर क्या इल्ज़ाम तुम आबाद घरों के वासी, मैं आवारा और बदनाम मेरे साथी ख़ाली जाम…. दो दिन तुमने प्यार जताया, दो दिन तुमसे मेल रहा अच्छा खासा वक़्त कटा, और अच्छा खासा … Continue reading

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पर्बतों के पेड़ों पर…

पर्बतों के पेड़ों पर, शाम का बसेरा है सुरमई  उजाला है, चंपई अँधेरा है दोनों वक़्त मिलते हैं, दो दिलों की सूरत से आसमाँ ने खुश होकर, रंग सा बिखेरा है

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वो हम न थे, वो तुम न थे…

वो हम न थे, वो तुम न थे, वो रहगुज़र थी प्यार की लुटी जहाँ पे बेवजह, पालकी बहार की ये खेल था नसीब का, न हँस सके, न रो सके न तूर पर पहुँच सके, न दार पर ही … Continue reading

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