जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना
अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाये।
नयी ज्योति के धर नये पंख झिलमिल,
उडे मर्त्य मिट्टी गगन-स्वर्ग छू ले,
लगे रोशनी की झड़ी झूम ऐसी,
निशा की गली में तिमिर राह भूले,
खुले मुक्ति का वह किरण-द्वार जगमग,
ऊषा जा न पाये, निशा आ ना पाये।
