जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना…

जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना
अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाये।

नयी ज्योति के धर नये पंख झिलमिल,
उडे मर्त्य मिट्टी गगन-स्वर्ग छू ले,
लगे रोशनी की झड़ी झूम ऐसी,
निशा की गली में तिमिर राह भूले,
खुले मुक्ति का वह किरण-द्वार जगमग,
ऊषा जा न पाये, निशा आ ना पाये।

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आई दीवाली आई, कैसे उजाले लाई…

आई दीवाली आई, कैसे उजाले लाई
घर-घर खुशियों के दीप जले ….

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सूरज, ज़रा, आ पास आ….

सूरज, ज़रा, आ पास आ,
आज सपनों की रोटी पकायेंगे हम
ऐ आसमाँ, तू बड़ा मेहरबाँ
आज तुझको भी दावत खिलायेंगे हम

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मौसम बीता जाये….

भाई रे, गंगा और जमुना की गहरी है धार
आगे या पीछे सबको जाना है पार

धरती कहे पुकार के, बीज बिछा ले प्यार के
मौसम बीता जाये, मौसम बीता जाये

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पिघला है सोना दूर गगन पर, फैल रहे हैं शाम के साये….

Sunset at Alster lake in Hamburg (Sept. 2013). Photo: Rajnish Tiwari

Sunset at Alster lake in Hamburg. Photo: R. Tiwari (Sept. 2013)

पिघला है सोना दूर गगन पर, फैल रहे हैं शाम के साये….

भगवन तेरी सुन्दर रचना कितनी प्यारी है,
तेरी महिमा के गुण गाता हर नर-नारी है

ख़ामोशी कुछ बोल रही है, भेद अनोखे खोल रही है
पंख-पखेरू सोच में ग़ुम हैं, पेड़ खड़े हैं शीश झुकाये
पिघला है सोना दूर गगन पर, फैल रहे हैं शाम के साये

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