Tag Archives: उर्दू (हिन्दुस्तानी)

आसमाँ पे है खुदा और ज़मीं पे हम

आसमाँ पे है खुदा और ज़मीं पे हम आजकल वो इस तरफ देखता है कम आजकल किसी को वो टोकता नहीं, चाहे कुछ भी कीजिये रोकता नहीं, हो रही है लूटमार, फट रहे हैं बम आसमाँ पे है खुदा ….

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आज के इस इंसान को ये क्या हो गया?

आज के इस इंसान को ये क्या हो गया? इसका पुराना प्यार कहाँ पर खो गया? कैसी ये मनहूस घड़ी है भाइयों में जंग छिड़ी  है कहीं पे खून, कहीं पर ज्वाला जाने क्या है होने वाला सबका माथा आज … Continue reading →

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हौसला

वो ज़िन्दगी का सफ़र हो कि जंग का मैदान मुहाज़ कोई भी हो, हौसला ज़रूरी है * —- * शब्दार्थ मुहाज़ = (war) front —- शेर: इदरीस ज़िया डॉ. ज़रीना सानी और डॉ. विनय वाईकर की पुस्तक “आईना-ए-ग़ज़ल” (पाँचवां संशोधित संस्करण … Continue reading →

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तथाकथित सभ्यता / So-called Civilization

हुए इस कदर मुहज़्ज़ब, कभी घर का मुँह न देखा कटी उम्र होटलों में, मरे अस्पताल जाकर —- * शब्दार्थ मुहज़्ज़ब = सभ्य, शिष्ट, civilized —- शेर: अकबर इलाहाबादी डॉ. ज़रीना सानी और डॉ. विनय वाईकर की पुस्तक “आईना-ए-ग़ज़ल” (पाँचवां संशोधित … Continue reading →

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मेअराज-ए-सितम

देखना चाहो अगर तुम अपनी मेअराज-ए-सितम मुस्कुरा देना मेरी बरबादी-ए-दिल देखकर

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