Tag Archives: ओशो

शहरी जेबकतरा

बस में अपनी जेब कटती देख, यात्री ने शोर मचाया जेबकतरा उसे पकड़ कर थाने लाया और थानेदार से बोला, हुज़ूर, यह आदमी शहर में अव्यवस्था फैलाता है हमें शांतिपूर्वक जेब नहीं काटने देता गँवारों की तरह चिल्लाता है थानेदार … Continue reading →

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गाँव में शहर की महिला

शहर की एक महिला ने हिम्मत दिखाई, वह प्रौढ़ों को शिक्षित करने के लिये गाँव में आई एक दिन यूँ ही बैठी-बैठी सुस्ता रही थी और एक गीत गा रही थी ” ओ सावन के बदरा, ” आये नहीं हमारे … Continue reading →

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नेता और चुनावी टिकट

हमने परिचित नेता से प्रश्न किया: आपने जिस ढंग से अपने सिर पर टोपी लगाई उसे देखकर सभी की बुद्धि भरमाई आपको देखकर लोग कई तरह के अनुमान लगा रहे हैं अतः कृपया बतायें कि आप पार्टी में आ रहे … Continue reading →

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निरादरणीय दल-बदलू जी…

निरादरणीय दल-बदलू जी, बार-बार धिक्कार सुना है आपने दूसरा दल भी छोड़ दिया अपना भाग्य फोड़ा या उनका फोड़ दिया लोग व्यर्थ ही संशय करते हैं कि आप कैसे हैं किंतु आप क्या करें आपके संस्कार ही ऐसे हैं अस्पताल … Continue reading →

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आपका इंतज़ार क्या करते

जीस्त को पुर-बहार क्या करते दिल ही था सोगवार क्या करते आपके ग़म की बात है वरना खुद को हम बेक़रार क्या करते

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