आज के इस इंसान को ये क्या हो गया?
इसका पुराना प्यार कहाँ पर खो गया?
कैसी ये मनहूस घड़ी है
भाइयों में जंग छिड़ी है
कहीं पे खून, कहीं पर ज्वाला
जाने क्या है होने वाला
सबका माथा आज झुका है
आज़ादी का जुलूस रुका है
चारों ओर दग़ा ही दग़ा है
हर छुरे पर खून लगा है
आज दुखी है जनता सारी
रोते हैं लाखों नर-नारी
रोते हैं आँगन-गलियारे
रोते आज मोहल्ले सारे
रोती सलमा रोती है सीता
रोते हैं कुरआन औ गीता
आज हिमालय चिल्लाता है
कहाँ पुराना वो नाता है
डस लिया सारे देश को ज़हरी नागों ने
घर को लगा दी आग घर के चिरागों ने