Category Archives: Sher-o-Shayari

“आपकी क़सम” / Aapki Qasam

आप ख़ुद ही सोचिये मैं हूँ उन्हें कितना अज़ीज़ वो ख़ुदा को छोड़कर मेरी क़सम खाने लगे शेर: शकील बदायूँनी 

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क़िस्मत / Kismat

उन्हें ठहरे समुन्दर ने डुबोया जिन्हें तूफाँ का अंदाज़ा बहुत था शेर: डॉ. मंज़ूर अहमद मंज़ूर   डॉ. ज़रीना सानी और डॉ. विनय वाईकर की पुस्तक “आईना-ए-ग़ज़ल” (पाँचवां संशोधित संस्करण 2002, श्री मंगेश प्रकाशन, नागपुर, पृष्ठ 1) से साभार उद्धृत —– Unhen thahre … Continue reading →

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मुहब्बत का अंजाम / Muhabbat Ka Anjaam

ऐ मुहब्बत, तेरे अंजाम पे रोना आया जाने क्यों आज, तेरे नाम पे रोना आया यूँ तो हर शाम उम्मीदों में गुज़र जाती थी आज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया

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अज़्म-ए-इन्साँ / Azm-e-insaan

अज़्म-ए-इन्साँ  है कि बन जाये फ़रिश्ता लेकिन। हर फ़रिश्ते को ये हसरत है कि इन्साँ  होता।। (*अज़्म = ख्वाहिश, संकल्प, determination) शेर: बिस्मिल सईदी डॉ. ज़रीना सानी और डॉ. विनय वाईकर की पुस्तक “आईना-ए-ग़ज़ल” (पाँचवां संशोधित संस्करण 2002, श्री मंगेश प्रकाशन, … Continue reading →

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वो हम न थे, वो तुम न थे…

वो हम न थे, वो तुम न थे, वो रहगुज़र थी प्यार की लुटी जहाँ पे बेवजह, पालकी बहार की ये खेल था नसीब का, न हँस सके, न रो सके न तूर पर पहुँच सके, न दार पर ही … Continue reading →

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