Author Archives: Rajnish Tiwari

सुबह का इंतज़ार कौन करे…

सुरमई रात है, सितारे हैं आज दोनों जहाँ हमारे हैं सुबह का इंतज़ार कौन करे.. ये रुत ये समाँ मिले न मिले आरज़ू का चमन खिले न खिले वक़्त का ऐतबार कौन करे…

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सावन में आल्हा-पाठ : सेना के कूच का वर्णन

बुंदेलखंड में सावन के महीने में बरसात की रिमझिम के बीच “आल्हा” गाने का प्रचलन है। वीर-रस के इस काव्य में महोबा के चंदेल शासकों और उनके बनाफर सामंतों आल्हा और ऊदल की शौर्य गाथाओं का वर्णन है। सोचा इस … Continue reading →

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मेरे साथी ख़ाली जाम…

महफ़िल से उठ जाने वालो, तुम लोगों पर क्या इल्ज़ाम तुम आबाद घरों के वासी, मैं आवारा और बदनाम मेरे साथी ख़ाली जाम…. दो दिन तुमने प्यार जताया, दो दिन तुमसे मेल रहा अच्छा खासा वक़्त कटा, और अच्छा खासा … Continue reading →

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