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किसे याद रखूँ, किसे भूल जाऊँ

कोई दिल में है, और कोई है नज़र में, मोहब्बत के सपने, मैं किस पे लुटाऊँ। इसी कशमकश में, जिये जा रहा हूँ, किसे याद रखूँ, किसे भूल जाऊँ।।

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पैसे का मंतर, पैसे का जंतर

पैसे का मंतर, पैसे का जंतर पैसा-पैसा छू जाते प्राण पलट के आवें गज़ब तेरा जादू छू-छू मंतर, है जादू मंतर

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देने वाला जब भी देता…

देने वाला जब भी देता, पूरा छप्पर फाड़ के देता नंग-धडंग-मलंग जनों को दूरबीन से ताड़ के देता न देखे वो गोरा-काला, न देसी-परदेसी जब चाहे सोने से भर दे, फटे टाट की ठेसी जिस पर उसको प्यार आ जाता, … Continue reading

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