किसे याद रखूँ, किसे भूल जाऊँ

कोई दिल में है, और कोई है नज़र में,
मोहब्बत के सपने, मैं किस पे लुटाऊँ।
इसी कशमकश में, जिये जा रहा हूँ,
किसे याद रखूँ, किसे भूल जाऊँ।।

उधर दिल मोहब्बत में, उनको दिया है,
इधर फ़र्ज़ का बोझ, सर पे लिया है।
अरी ज़िन्दगी तूने, ये क्या किया है,
किसे याद रखूँ, किसे भूल जाऊँ।।

न बस में है मेरे, उन्हें भूल जाना,
न बस में है इनको, नज़र से गिराना।
मेरी बेबसी का बस, इतना फ़साना,
किसे याद रखूँ, किसे भूल जाऊँ।।


गीत: कैफ़ इरफ़ानी / Lyric: Kaif Irfani
गायक: मुकेश / Singer: Mukesh
संगीत: मुकेश (!) / Music: Mukesh (!)
फिल्म: अनुराग (१९५६) / Film: Anurag (1956)

Koi dil mein hai, aur koi hai nazar mein
Mohabbat ke sapne main, kis pe lutaun
Isi kashamkash mein, jiye ja raha hoon
Kise yaad rakhun, kise bhool jaun


Note: “Muhabbat” and “Mohabbat” (मुहब्बत/मोहब्बत) are generally used as synonyms (पर्यायवाची).

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