Tag Archives: हिन्दी पद्य

दहेज की बारात

जा दिन एक बारात को मिल्यौ निमंत्रण-पत्र फूले-फूले हम फिरें, यत्र-तत्र-सर्वत्र यत्र-तत्र-सर्वत्र, फरकती बोटी-बोटी बा दिन अच्छी नाहिं लगी अपने घर रोटी कहँ ‘काका’ कविराय, लार म्हौंड़े सों टपके कर लड़ुअन की याद, जीभ स्याँपन सी लपके

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गाँव में शहर की महिला

शहर की एक महिला ने हिम्मत दिखाई, वह प्रौढ़ों को शिक्षित करने के लिये गाँव में आई एक दिन यूँ ही बैठी-बैठी सुस्ता रही थी और एक गीत गा रही थी ” ओ सावन के बदरा, ” आये नहीं हमारे … Continue reading →

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सफल नेता

सफल राजनीतिज्ञ वह जो, जन गण में व्याप्त । जिस पद को वह पकड़ ले, कभी न होय समाप्त ॥ कभी न होय समाप्त, घुमाए पहिया ऐसा । पैसा से पद मिले, मिले फिर पद से पैसा ॥ कँह काका … Continue reading →

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जय बोलो बेईमान की

मन, मैला, तन ऊजरा, भाषण लच्छेदार, ऊपर सत्याचार है, भीतर भ्रष्टाचार। झूटों के घर पंडित बाँचें, कथा ‘सत्य-भगवान’ की, जय बोलो बेईमान की! प्रजातंत्र के पेड़ पर, कौआ करें किलोल, टेप-रिकार्डर में भरे, चमगादड़ के बोल। नित्य नई योजना बन … Continue reading →

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नगरपालिका वर्णन

पार्टीबंदी हों जहाँ, घुसे अखाड़ेबाज़ मक्खी, मच्छर, गंदगी का रहता हो राज का रहता हो राज, सड़क हों टूटी – फूटी नगरपिता मदमस्त, छानते रहते बूटी कहँ ‘काका’ कविराय, नहीं वह नगरपालिका बोर्ड लगा दो उसके ऊपर ‘नरकपालिका’

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