दिल की परेशानियाँ, इश्क की वीरानियाँ
कौन सुनेगा मेरी, दर्द भरी दास्ताँ
दिल को मेरे तोड़ के, साथ मेरा छोड़ के
तूने तो सब पा लिया, मैंने गँवाया जहाँ
दर्द भरी दास्ताँ |
दिल की परेशानियाँ, इश्क की वीरानियाँ
कौन सुनेगा मेरी, दर्द भरी दास्ताँ
दिल को मेरे तोड़ के, साथ मेरा छोड़ के
तूने तो सब पा लिया, मैंने गँवाया जहाँ
दर्द भरी दास्ताँ |
मोहब्बत भी झूठी, ज़माना भी झूठा
मोहब्बत का है ये फ़साना भी झूठा
अदायें भी झूठीं, वफायें भी झूठीं
ये सब रूठ जाना मनाना भी झूठा
मोहब्बत भी झूठी…
चलो एक बार फिर से अजनबी बन जायें हम दोनों
न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखूँ दिलनवाज़ी की,
न तुम मेरी तरफ देखो ग़लत-अंदाज़ नज़रों से |
न मेरे दिल की धड़कन लड़खड़ाये मेरी बातों में,
न जाहिर हो तुम्हारी कशमकश का राज़ नज़रों से ||
चलो एक बार फिर से…
“Ek jhoothi si tasalli woh mujhe deke chale”: A very rare & beautiful song of Mukesh, from film: Shisham
एक झूठी सी तसल्ली, वो मुझे देके चले
मेरा दिल लेके चले…
तेरे वादों के सहारे पे, जिये जायेंगे हम
सहते जायेंगे सितम
राज़ ये तेरे सिवा, और कोई जान न ले
मेरा दिल लेके चले…
एक झूठी सी तसल्ली |
यों होता, तो क्या होता?
(मिर्ज़ा ग़ालिब)
न था कुछ तो खुदा था, कुछ न होता, तो खुदा होता,
डुबोया मुझको होने ने, न होता मैं, तो क्या होता?
हुआ जब ग़म से यूँ बेहिस, तो ग़म क्या सर के कटने का,
न होता गर जुदा तन से, तो ज़ानू पर धरा होता |
हुई मुद्दत, कि ग़ालिब मर गया, पर याद आता है,
वो हर बात पर कहना, कि यों होता, तो क्या होता?
—–
बेहिस = स्तब्ध, ज़ानू = घुटना
(Sher-o-Shayari by Mirza Ghalib; Couplet: “Yon Hota, To Kya Hota”)
Excerpted from: दीवान-ए-ग़ालिब (हिंदी संस्करण, संपादक: क़ज़लबाश सुहरावर्दी, प्रकाशक: डी.पी.एस. बुक्स, नई दिल्ली, पृष्ठ: 47)