कर्महीन

कहा दोष करतार को, कर्म कुटिल गह बाँह
कर्महीन किलपत रहै, कल्प वृक्ष की छाँह

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श्रेणी: बुन्देलखंड की लोकोक्तियाँ
स्रोत: दोहा ज्ञान अमृत सागर (संग्रहकर्ता: श्री देवीदीन विश्वकर्मा, कीरतपुरा, महोबा, उ.प्र.)
मुद्रक: गोपाल ऑफसेट प्रेस (मऊरानीपुर, झाँसी, उ.प्र.)
श्री राम सनेही तिवारी (महोबा) द्वारा पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और संवर्धन हेतु उपलब्ध कराई गई

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