Category Archives: Sher-o-Shayari

यों होता, तो क्या होता?

यों होता, तो क्या होता? (मिर्ज़ा ग़ालिब) न था कुछ तो खुदा था, कुछ न होता, तो खुदा होता, डुबोया मुझको होने ने, न होता मैं, तो क्या होता? हुआ जब ग़म से यूँ बेहिस, तो ग़म क्या सर के … Continue reading

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आवारा (मजाज़ लखनवी)

शहर की रात और मैं, नाशाद-ओ-नाकारा फिरूँ जगमगाती जागती, सड़कों पे आवारा फिरूँ ग़ैर की बस्ती है, कब तक दर-ब-दर मारा फिरूँ ऐ ग़म-ए-दिल क्या करूँ, ऐ वहशत-ए-दिल क्या करूँ

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